Sardar Vallabhbhai Patel Nibandh: नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करेंगे भारत के एक महान नेता की, जिन्हें हम लौह पुरुष कहते हैं। वे हैं सरदार वल्लभभाई पटेल। सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे और उन्होंने हमारे देश को एकजुट बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया।
स्कूल के बच्चों के लिए वे एक प्रेरणा हैं, क्योंकि उन्होंने मेहनत, ईमानदारी और देशभक्ति से बड़ा मुकाम हासिल किया। जब मैं छोटा था, तो स्कूल में उनकी कहानियां सुनकर मन में गर्व होता था। सोचो, एक व्यक्ति ने पूरे देश को जोड़कर रखा! यह निबंध हिंदी में लिखा है, ताकि पहली से दसवीं कक्षा के बच्चे आसानी से पढ़ सकें। आइए, जानते हैं सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे में।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाड में हुआ था। उनके पिता झावरभाई पटेल झांसी की रानी की सेना में लड़ चुके थे और मां लाडबा बहुत धार्मिक थीं। बचपन से ही वल्लभभाई बहुत बहादुर और मेहनती थे। वे पढ़ाई में अच्छे थे और बाद में इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर बने।
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भारत लौटकर अहमदाबाद में वकील का काम करने लगे। लेकिन जब महात्मा गांधी से मिले, तो उनका जीवन बदल गया। गांधीजी की बातों से प्रभावित होकर वे स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े। मुझे लगता है, गांधीजी और सरदार पटेल की दोस्ती कितनी मजबूत थी! दोनों मिलकर देश को आजाद कराने का सपना देखते थे।
सरदार पटेल ने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। खेड़ा सत्याग्रह में किसानों की मदद की, जब ब्रिटिश सरकार ने ज्यादा टैक्स लगा दिया था। फिर बारडोली सत्याग्रह में किसानों का नेतृत्व किया। वहां की महिलाओं ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि दी, क्योंकि वे इतने बहादुर और न्यायप्रिय थे।
इस सफलता से पूरे देश में उनकी चर्चा हुई। वे नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भी जेल गए। जेल में कष्ट सहा, लेकिन कभी हार नहीं मानी। सोचो, कितनी हिम्मत थी उनमें! आज हम आराम से स्कूल जाते हैं, लेकिन उन्होंने देश के लिए सब कुछ त्याग दिया। यह सोचकर दिल में सम्मान जगता है।
आजादी के बाद सरदार पटेल का सबसे बड़ा काम था – देश की रियासतों को जोड़ना। उस समय भारत में 562 छोटी-बड़ी रियासतें थीं। अगर वे अलग हो जातीं, तो देश टुकड़ों में बंट जाता। सरदार पटेल ने अपनी बुद्धिमत्ता और दृढ़ता से उन राजाओं को मनाया।
हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी मुश्किल रियासतों को भी भारत में मिलाया। इस काम के लिए उन्हें भारत का लौह पुरुष और आधुनिक भारत का बिस्मार्क कहा जाता है। वे भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। उनकी मेहनत से आज हम एक मजबूत भारत में रहते हैं। गुजरात में उनकी याद में बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है, जो उनकी एकता की भावना को दिखाती है।
सरदार पटेल हमें सिखाते हैं कि एकता में ताकत है। वे कहते थे, “हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश की रक्षा करे।” उनका जीवन प्रेरणा देता है कि मेहनत और देशभक्ति से कुछ भी संभव है। दुर्भाग्य से, 15 दिसंबर 1950 को वे हमें छोड़कर चले गए। लेकिन उनकी यादें आज भी जीवित हैं। हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाते हैं।
अंत में कहूंगा, सरदार वल्लभभाई पटेलहर बच्चे के लिए आदर्श हैं। वे हमें बताते हैं कि देश सबसे ऊपर है। आइए, हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें और भारत को और मजबूत बनाएं। जय हिंद!