Essay On Role Of Children In Nation Building: बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। वे छोटे-छोटे बीज की तरह हैं, जो बड़े होकर मजबूत पेड़ बनते हैं और पूरे जंगल को हरा-भरा रखते हैं। राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
जैसे एक घर बनाने में ईंटें जरूरी होती हैं, वैसे ही एक मजबूत राष्ट्र बनाने में बच्चे आधार स्तंभ होते हैं। आज हम बात करेंगे कि बच्चे कैसे राष्ट्र को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। यह निबंध विशेष रूप से स्कूल के बच्चों के लिए लिखा गया है, ताकि वे समझ सकें कि उनकी छोटी-छोटी कोशिशें कितनी बड़ी बदलाव ला सकती हैं।
सबसे पहले, शिक्षा के माध्यम से बच्चे राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। पढ़ाई-लिखाई से बच्चे ज्ञान प्राप्त करते हैं। जब वे स्कूल में अच्छे से पढ़ते हैं, तो बड़े होकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या नेता बनते हैं। उदाहरण के लिए, हमारे देश के महान नेता जैसे महात्मा गांधी या स्वामी विवेकानंद ने बचपन से ही सीखने की आदत डाली थी।
ये भी पढ़ें: Veer Bal Diwas Par Speech In Hindi: वीर बाल दिवस भाषण
बच्चे अगर आज मेहनत करेंगे, तो कल देश को मजबूत बनाएंगे। लेकिन सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। बच्चे ईमानदारी, मेहनत और सच्चाई सीखकर राष्ट्र को भ्रष्टाचार से मुक्त रख सकते हैं। कल्पना कीजिए, अगर हर बच्चा स्कूल में साफ-सफाई रखे और दोस्तों को भी सिखाए, तो पूरा देश स्वच्छ हो जाएगा। यह छोटी बात लगती है, लेकिन यही राष्ट्र निर्माण की नींव है।
दूसरा, बच्चे पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। आज जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या है। बच्चे पेड़ लगाकर, पानी बचाकर और प्लास्टिक का उपयोग कम करके मदद कर सकते हैं। मेरे एक दोस्त ने स्कूल में एक अभियान चलाया था, जहां सभी बच्चों ने मिलकर पार्क साफ किया।
उस दिन हमें इतना अच्छा लगा, जैसे हमने देश के लिए कुछ बड़ा किया हो। बच्चे अगर घर पर माता-पिता को बताएं कि कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें, तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। राष्ट्र निर्माण में यह भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वस्थ पर्यावरण से ही स्वस्थ नागरिक बनते हैं। बच्चे प्रकृति से प्यार करेंगे, तो देश हरा-भरा और मजबूत बनेगा।
तीसरा, एकता और भाईचारा फैलाने में बच्चों की भूमिका अनमोल है। बच्चे खेल-कूद में सभी दोस्तों को साथ लेते हैं, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म या भाषा के हों। स्कूल में त्योहार मनाते समय, वे सबको जोड़ते हैं। जैसे दीवाली पर पटाखे न जलाकर दीये जलाते हैं और होली पर रंगों से खेलते हैं, वैसे ही वे देश में शांति फैला सकते हैं।
अगर बच्चे आपस में झगड़ा न करें और सबको सम्मान दें, तो बड़ा होकर वे राष्ट्र को एकजुट रखेंगे। याद कीजिए, हमारे स्वतंत्रता संग्राम में भी युवा और बच्चे साथ आए थे। आज भी, बच्चे सोशल मीडिया पर अच्छी बातें शेयर करके जागरूकता फैला सकते हैं, लेकिन सावधानी से, क्योंकि गलत जानकारी हानि पहुंचा सकती है।
चौथा, बच्चे भविष्य के नेता हैं। वे आज से ही छोटे-छोटे निर्णय लेकर राष्ट्र निर्माण में भाग ले सकते हैं। जैसे, स्कूल की छात्र परिषद में चुनाव लड़कर लोकतंत्र सीखना। या घर में परिवार की मदद करके जिम्मेदारी समझना। मेरी बहन ने एक बार स्कूल प्रोजेक्ट में गांव के बच्चों को पढ़ाया, और उसे लगा कि वह देश की सेवा कर रही है। ऐसे अनुभव दिल को छू जाते हैं और प्रेरणा देते हैं।
बच्चे अगर सपने देखें और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें, तो राष्ट्र उन्नति करेगा। लेकिन याद रखें, राष्ट्र निर्माण में धैर्य और निरंतर प्रयास जरूरी हैं। कभी-कभी असफलता आती है, लेकिन उससे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।
अंत में, बच्चे राष्ट्र निर्माण के सच्चे कर्णधार हैं। उनकी मासूमियत, उत्साह और नई सोच देश को नई दिशा देती है। अगर हर बच्चा अपनी जिम्मेदारी समझे, तो भारत जैसे महान राष्ट्र और मजबूत बनेगा। माता-पिता, शिक्षक और समाज को बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। आइए, हम सब मिलकर प्रयास करें। बच्चे, तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है, और तुम्हारे हाथों में देश का कल है। जय हिंद!