Bhashan On Rajasthan Diwas: सुप्रभात, आदरणीय मुख्याध्यापक जी, शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों। आज का दिन हमारे लिए बहुत खास है। मैं यहां खड़ा हूं और सोच रहा हूं कि कैसे कुछ शब्दों में उस जगह की कहानी सुना सकूं जहां रेत के टीले हवाओं से बातें करते हैं, जहां महल इतिहास की गूंज सुनाते हैं।
हां, आज मैं राजस्थान दिवस के बारे में बात करने वाला हूं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारा राजस्थान कितना मजबूत और सुंदर है। मैं एक छोटा सा बच्चा हूं, लेकिन जब मैं राजस्थान के बारे में सोचता हूं, तो मेरे मन में गर्व की एक लहर दौड़ जाती है। जैसे कोई पुरानी कहानी जो दादी सुनाती हैं, वैसी ही। चलिए, अब हम इस यात्रा पर चलते हैं।
यह राजस्थान दिवस स्पीच है, जो विशेष रूप से स्कूल के बच्चों के लिए तैयार की गई है। राजस्थान दिवस हर साल 30 मार्च को मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं क्यों? क्योंकि 30 मार्च 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसी बड़ी-बड़ी रियासतों का विलय हुआ था।
इससे ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना, जो आज का हमारा राजस्थान है। कल्पना कीजिए, पहले यहां कई छोटे-छोटे राज्य थे, जहां राजा-महाराजा शासन करते थे। वे वीर योद्धा थे, जो दुश्मनों से लड़ते थे और अपनी धरती की रक्षा करते थे। सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने इन सबको एक साथ जोड़ा, ताकि हमारा राज्य मजबूत बने। यह दिन हमें बताता है कि एकता में कितनी ताकत है। जैसे हम स्कूल में सब बच्चे मिलकर खेलते हैं, वैसे ही उन रियासतों ने मिलकर राजस्थान बनाया।
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राजस्थान की धरती रेत की है, लेकिन यहां का दिल सोने जैसा है। यहां के लोग कितने मेहनती हैं! किसान सुबह-सुबह खेतों में जाते हैं, जहां पानी कम है, फिर भी वे फसल उगाते हैं। मुझे याद है, एक बार मैं अपने दादाजी के साथ जैसलमेर गया था। वहां का किला देखकर मैं हैरान हो गया।
वह किला रेत के बीच में खड़ा है, जैसे कोई जादुई महल। और शाम को जब सूरज डूबता है, तो पूरा किला सुनहरा हो जाता है। क्या आपने कभी ऊंट की सवारी की है? राजस्थान में थार का रेगिस्तान है, जहां ऊंट चलते हैं और लोग गीत गाते हैं। यहां की संस्कृति इतनी रंगीन है।
घूमर नृत्य देखिए, महिलाएं रंग-बिरंगे घाघरे पहनकर नाचती हैं। मुझे तो लगता है, जैसे पूरी धरती नाच रही हो। और गणगौर का त्योहार, जहां देवी पार्वती की पूजा होती है। बच्चे कितने खुश होते हैं, मिठाइयां खाते हैं, खेलते हैं। राजस्थान दिवस पर हमें इन सबकी याद आती है, और हम सोचते हैं कि हमारी जड़ें कितनी गहरी हैं।
लेकिन राजस्थान सिर्फ इतिहास नहीं है, यह हमारा वर्तमान और भविष्य भी है। यहां के वीरों की कहानियां हमें प्रेरणा देती हैं। जैसे महाराणा प्रताप, जो अपने घोड़े चेतक के साथ जंगलों में लड़ते रहे, लेकिन कभी हार नहीं माने। या रानी पद्मिनी, जिन्होंने अपनी इज्जत की रक्षा के लिए जौहर किया। ये कहानियां सुनकर मेरे मन में एक अजीब सी भावना आती है – गर्व की, लेकिन थोड़ी उदासी भी।
क्योंकि वे इतने बहादुर थे, और हम आज उनकी वजह से यहां हैं। आज राजस्थान में बड़े-बड़े शहर हैं, जैसे जयपुर, जो पिंक सिटी कहलाता है। वहां आमेर का किला है, जहां हाथी सवारी होती है। और उदयपुर की झीलें, जो इतनी शांत हैं कि मन को सुकून मिलता है।
लेकिन साथ ही, यहां चुनौतियां भी हैं। पानी की कमी है, गर्मी बहुत है। फिर भी लोग मुस्कुराते हैं, मेहमानों का स्वागत करते हैं। राजस्थान के लोग कहते हैं, “पधारो म्हारे देश” यानी, हमारे देश में पधारिए। यह शब्द सुनकर कितना अच्छा लगता है, जैसे कोई अपना बुला रहा हो।
राजस्थान दिवस हमें सिखाता है कि हमें अपनी संस्कृति को बचाना है। हम बच्चे क्या कर सकते हैं? हम स्कूल में राजस्थानी गीत सीख सकते हैं, चित्र बना सकते हैं राजस्थान के। घर में दादी-नानी से पुरानी कहानियां सुन सकते हैं। और बड़े होकर, हम राजस्थान को और बेहतर बना सकते हैं।
जैसे पेड़ लगाकर रेगिस्तान को हरा-भरा करना, या पानी बचाना। मुझे लगता है, राजस्थान का हर बच्चा एक योद्धा है, जो अपने राज्य के लिए कुछ अच्छा करना चाहता है। जब मैं इन सबके बारे में सोचता हूं, तो मेरे दिल में एक गर्माहट सी आती है, जैसे सूरज की पहली किरण। राजस्थान हमारा घर है, हमारी पहचान है।
अंत में, मैं कहना चाहता हूं कि राजस्थान दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह हमारी भावनाओं का उत्सव है। हमें गर्व है कि हम राजस्थानी हैं। आइए, हम सब मिलकर जय राजस्थान कहें। धन्यवाद। जय हिंद।