Pulwama Attack Bhashan Hindi: सम्माननीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय शिक्षकगण, और मेरे प्यारे साथियों,
नमस्कार! आज मैं आपके सामने एक ऐसे विषय पर बोलने जा रहा हूं, जो हमारे दिलों को छू जाता है और हमें अपने देश के वीर सैनिकों की याद दिलाता है। यह विषय है हमारे बहादुर जवानों का बलिदान, जो उन्होंने देश की रक्षा के लिए दिया।
हम सब जानते हैं कि भारत एक महान देश है, जहां लोग आपस में मिल-जुलकर रहते हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ बुरी ताकतें हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में हमारे जवान हमें बचाते हैं। आज का यह भाषण उन वीरों को समर्पित है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा की। चलिए, हम सब मिलकर उन्हें याद करें और उनके बलिदान से सीख लें।
अब मैं भाषण के बारे में बात करना शुरू करता हूं। 14 फरवरी 2019 का वह दिन, जो वैलेंटाइन्स डे के रूप में जाना जाता है, लेकिन उस दिन हमारे देश में एक बड़ा दुखद हादसा हुआ। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में, जहां बर्फीली सड़कें और पहाड़ हैं, वहां हमारे सीआरपीएफ के जवान एक बस में जा रहे थे। वे देश की सुरक्षा के लिए जा रहे थे, अपने परिवारों से दूर।
अचानक, एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को उनके काफिले से टकरा दिया। वह धमाका इतना जोरदार था कि पूरा इलाका कांप उठा। उस हमले में हमारे 40 बहादुर जवान शहीद हो गए। सोचिए, वे जवान कितने बहादुर थे! वे घर से निकले थे देश की सेवा करने, लेकिन कभी वापस नहीं लौट सके। उनके परिवारों का क्या हुआ होगा? मां-बाप, पत्नी, बच्चे सब रोते बिलखते रह गए। यह सोचकर ही दिल दुख जाता है।
उस दिन की घटना हमें बताती है कि दहशतवाद कितना बुरा है। जैश-ए-मोहम्मद नामक संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। वह आतंकवादी, जिसका नाम आदिल अहमद डार था, वह एक स्थानीय युवक था, लेकिन गलत राह पर चल पड़ा। हमारे जवान शांतिपूर्वक जा रहे थे, लेकिन इस हमले ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया। प्रधानमंत्री जी से लेकर आम आदमी तक, सबने आंसू बहाए।
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मैंने खुद टीवी पर देखा था जवान के शवों को तिरंगे में लपेटकर लाया जा रहा था। उनके चेहरे पर मुस्कान थी, जैसे वे कह रहे हों, “हमने देश के लिए सब कुछ दे दिया।” यह दृश्य देखकर मेरी आंखें नम हो गईं। क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हमारे जवान न होते, तो हम स्कूल में सुरक्षित कैसे बैठ पाते? वे सीमाओं पर खड़े रहते हैं, ठंड में, गर्मी में, बिना थके। पुलवामा की यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें उनके बलिदान को कभी भूलना नहीं चाहिए।
उस हमले के बाद क्या हुआ? पूरे भारत में गुस्सा था, लेकिन साथ ही एकता भी। लोग सड़कों पर निकल आए, कैंडल मार्च निकाले, और जवानों को श्रद्धांजली दी। हमारे वायुसेना ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की, जहां आतंकवादियों के ठिकाने थे।
इससे दुनिया को संदेश मिला कि भारत किसी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। लेकिन सोचिए, क्या युद्ध से समस्या हल होती है? नहीं, हमें शांति की जरूरत है। स्कूल में हमें सिखाया जाता है कि हिंसा कभी अच्छी नहीं होती। दहशतवाद से लड़ने के लिए हमें शिक्षा, प्यार और समझ की जरूरत है।
अगर युवा गलत राह पर न जाएं, तो ऐसे हमले रुक सकते हैं। पुलवामा के शहीद हमें सिखाते हैं कि देश से बड़ा कुछ नहीं। वे अलग-अलग राज्यों से थे पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बंगाल – लेकिन सब एक थे, भारत माता के बेटे। उनके नाम जैसे हेड कांस्टेबल नसीर अहमद, कांस्टेबल महेश कुमार – ये नाम हमें हमेशा प्रेरित करेंगे।
मैं एक कहानी याद करता हूं। एक जवान का बेटा था, जो छोटा था। जब पापा शहीद हुए, तो वह रोते हुए कहता था, “पापा कब आएंगे?” लेकिन बाद में वह बड़ा होकर खुद फौज में जाना चाहता है। ऐसी कहानियां हमें भावुक कर देती हैं। पुलवामा हमले ने हमें दिखाया कि जीवन कितना अनमोल है।
हमें अपने दोस्तों से झगड़ा नहीं करना चाहिए, बल्कि मिलकर रहना चाहिए। स्कूल में हम खेलते हैं, पढ़ते हैं, लेकिन बाहर दुनिया में खतरे हैं। हमारे जवान हमें बचाते हैं, इसलिए हमें उनका सम्मान करना चाहिए। हर 14 फरवरी को हम वैलेंटाइन्स डे मनाते हैं, लेकिन अब यह दिन शहीदों की याद का भी दिन है। हमें फूल देने की बजाय, देश के लिए कुछ करने का संकल्प लेना चाहिए। जैसे, पेड़ लगाना, साफ-सफाई रखना, या अच्छे नागरिक बनना।
दोस्तों, पुलवामा की घटना हमें दुख देती है, लेकिन साथ ही ताकत भी। हमें गर्व है अपने जवानों पर। वे अमर हैं, उनके बलिदान से देश मजबूत होता है। हमें दहशतवाद के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, लेकिन नफरत नहीं फैलानी। प्यार से ही दुनिया जीती जा सकती है। आइए, हम सब मिलकर प्रार्थना करें कि ऐसे हमले कभी न हों, और हमारे जवान सुरक्षित रहें।
अंत में, मैं कहना चाहता हूं कि पुलवामा के शहीदों को मेरा सलाम। जय हिंद! जय भारत! धन्यवाद।