Durga Puja Nibandh Hindi: नमस्कार दोस्तों! आज मैं आपको दुर्गा पूजा के बारे में बताना चाहता हूं। दुर्गा पूजा एक बहुत ही खास और खुशी भरा त्योहार है। जब मैं छोटा था, तो मां दुर्गा पूजा के समय घर में कितनी रौनक रहती थी। मां की मूर्ति आती थी, घर सजता था, और पूरे मोहल्ले में ढोल-नगाड़ों की आवाज गूंजती रहती थी।
ऐसा लगता था जैसे मां खुद हमारे घर आ गई हों। निबंध में हम यही बातें लिखते हैं कि यह त्योहार सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि परिवार, दोस्तों और पूरे समाज की खुशी का पर्व है।
दुर्गा पूजा क्यों मनाई जाती है? पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले महिषासुर नाम का एक राक्षस था जो बहुत ताकतवर हो गया था। वह देवताओं को भी परेशान कर रहा था। तब सभी देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियां एकत्र कीं और मां दुर्गा का जन्म हुआ।
मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से लड़ाई की और दसवें दिन उसे मार दिया। इसलिए हम विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं। सुनकर बच्चों को लगता है कि अच्छाई हमेशा जीतती है, चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न आए। मुझे यह कथा सुनकर बहुत गर्व होता है कि हमारी मां कितनी शक्तिशाली हैं। वे हमें सिखाती हैं कि डरना नहीं, बल्कि हिम्मत से लड़ना चाहिए।
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दुर्गा पूजा खासतौर पर पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, ओडिशा, झारखंड और त्रिपुरा में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। यहां पंडाल लगते हैं जहां बड़ी-बड़ी सुंदर मूर्तियां रखी जाती हैं। मां दुर्गा अपने बच्चों लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिक के साथ आती हैं।
ऐसा माना जाता है कि मां अपने मायके आती हैं, इसलिए विवाहित बेटियां मां के घर जाती हैं और खुशियां मनाती हैं। पंडालों में रोशनी, फूलों की सजावट, धूप-दीप और भजन होते हैं।
शाम को आरती होती है, जिसमें सब मिलकर गाते हैं। फिर भोग लगता है पुरी, सब्जी, खीर और ढेर सारे मिठाई! मुझे सबसे ज्यादा मजा तब आता है जब हम दोस्तों के साथ पंडाल घूमते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और ढेर सारा खाते हैं। निबंध में यही भावनाएं हैं कि यह त्योहार हमें एक-दूसरे के करीब लाता है।
दुर्गा पूजा के पांच मुख्य दिन होते हैं – षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी। षष्ठी को मां का आगमन होता है, अष्टमी और नवमी पर बहुत भक्ति से पूजा होती है, और दशमी को विसर्जन। विसर्जन के दिन सबकी आंखें नम हो जाती हैं क्योंकि मां को विदा करना पड़ता है।
लेकिन सब कहते हैं, “आगे साल में फिर मिलेंगे!” यह विदाई दुख देती है, लेकिन अगले साल की उम्मीद भी देती है। हमें सिखाता है कि जीवन में आने-जाने का चक्र चलता रहता है, लेकिन प्यार और भक्ति कभी खत्म नहीं होती। आजकल लोग पर्यावरण के लिए इको-फ्रेंडली मूर्तियां भी बनाते हैं, जो अच्छी बात है।
दोस्तों, दुर्गा पूजा हमें बताती है कि औरतों में कितनी ताकत है। मां दुर्गा हमें साहस, दया और न्याय की सीख देती हैं। इस त्योहार में हम सब मिलकर खुशियां बांटते हैं, गरीबों को खाना देते हैं और अच्छे काम करते हैं। मुझे लगता है कि अगर हम साल भर मां दुर्गा की तरह अच्छाई फैलाएं, तो दुनिया कितनी सुंदर हो जाएगी।
निबंध पढ़कर बच्चों को यही संदेश मिलता है कि त्योहार मनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसकी भावना को जीना। अंत में मैं कहना चाहता हूं – मां दुर्गा सबकी रक्षा करें और हमें हमेशा खुश रखें। जय मां दुर्गा!