Dr. Babasaheb Ambedkar Bhashan Hindi: आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्माननीय शिक्षकगण, और मेरे प्यारे सहपाठियों,
नमस्कार! आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हर साल 14 अप्रैल को हम डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की जयंती मनाते हैं। वे हमारे देश के एक महान नेता थे, जिन्होंने गरीबों और दलितों के लिए बहुत संघर्ष किया। मैं आज यहां खड़ा हूं, और मुझे गर्व हो रहा है कि मुझे उनके बारे में बोलने का मौका मिला।
बचपन से ही हम किताबों में उनके बारे में पढ़ते हैं, लेकिन क्या हम कभी सोचते हैं कि जीवन कितना कठिन था? वे हमें सिखाते हैं कि मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम सब बराबर हैं, और किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए।
डॉ बाबासाहेब अंबेडकर भाषण हिंदी में देते हुए, मैं सबसे पहले उनके जीवन की शुरुआत से बात करना चाहता हूं। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे एक दलित परिवार से थे, और उस समय दलितों के साथ बहुत भेदभाव होता था।
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स्कूल में उन्हें अलग बैठाया जाता था, पानी नहीं छूने दिया जाता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने बहुत मेहनत से पढ़ाई की। पहले भारत में, फिर अमेरिका और इंग्लैंड जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे बैरिस्टर बने, और अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री ली।
मुझे जब यह पढ़ाया गया, तो दिल में बहुत दर्द हुआ। सोचिए, कितना मुश्किल रहा होगा उनके लिए। लेकिन हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ाया। आज हम आराम से स्कूल जाते हैं, लेकिन उनके समय में ऐसा नहीं था। डॉ बाबासाहेब अंबेडकर भाषण हिंदी में बोलते हुए, मैं सोचता हूं कि अगर वे न होते, तो शायद हमारी जिंदगी वैसी नहीं होती।
डॉ अंबेडकर जी ने छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे कहते थे कि सब इंसान बराबर हैं। कोई ऊंचा-नीचा नहीं। उन्होंने महाड़ सत्याग्रह किया, जहां दलितों को तालाब का पानी पीने का अधिकार दिलाया। मुझे याद है, मेरी मैडम ने क्लास में यह कहानी सुनाई थी।
तब मुझे लगा कि कितना अन्याय होता था। आज भी कभी-कभी हम देखते हैं कि लोग जाति के नाम पर भेदभाव करते हैं। लेकिन अंबेडकर जी ने हमें सिखाया कि ऐसा नहीं करना चाहिए। वे भारत के संविधान के निर्माता थे। 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया, और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
संविधान में सबको बराबरी, आजादी, और न्याय का अधिकार दिया गया। लड़कियों को भी पढ़ने का हक, गरीबों को मदद। उनके बिना हमारा देश वैसा नहीं बन पाता। डॉ बाबासाहेब अंबेडकर भाषण हिंदी में देते हुए, मैं सभी बच्चों से कहना चाहता हूं कि हमें उनके सपनों को पूरा करना है। पढ़ाई में मेहनत करो, और दूसरों की मदद करो।
मुझे एक घटना याद आती है। अंबेडकर जी जब छोटे थे, तो एक बार उन्हें ट्रेन में यात्रा करने नहीं दिया गया क्योंकि वे दलित थे। वे रोए, लेकिन फिर ठान लिया कि वे बदलाव लाएंगे। ऐसे किस्से सुनकर दिल भर आता है। वे बौद्ध धर्म अपनाकर गए, क्योंकि वे हिंदू धर्म में छुआछूत से दुखी थे।
लेकिन उन्होंने कभी नफरत नहीं फैलाई। वे कहते थे, “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।” मेरे पापा कहते हैं कि अंबेडकर जी जैसे नेता हमें प्रेरित करते हैं। स्कूल में जब हम उनके चित्र को देखते हैं, तो लगता है कि वे हमें देखकर मुस्कुरा रहे हैं।
डॉ बाबासाहेब अंबेडकर भाषण हिंदी में बोलते हुए, मैं सोचता हूं कि आज का युवा उनके रास्ते पर चले। हम टीवी पर देखते हैं कि देश तरक्की कर रहा है, लेकिन अभी भी कुछ जगहों पर भेदभाव है। हमें मिलकर इसे खत्म करना है। अंबेडकर जी ने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। वे चाहते थे कि हर बच्चा पढ़े, हर व्यक्ति खुश रहे।
डॉ अंबेडकर जी ने कई किताबें लिखीं, जैसे “एनिहिलेशन ऑफ कास्ट”। उन्होंने मजदूरों के लिए कानून बनाए। 6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हुआ, लेकिन विचार आज भी जीवित हैं। हर साल महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें याद किया जाता है। डॉ बाबासाहेब अंबेडकर भाषण हिंदी में देते हुए, मैं कहना चाहता हूं कि हमें उनके जैसे बनना चाहिए। दया रखो, मेहनत करो, और देश के लिए काम करो। अगर हम सब ऐसा करें, तो भारत और मजबूत बनेगा।
अंत में, मैं कहना चाहता हूं कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। वे हमें बताते हैं कि संघर्ष से जीत मिलती है। आइए, हम सब मिलकर उनके सपनों को साकार करें। भारत माता की जय! जय भीम!
धन्यवाद।