Beti Bachao Beti Padhao Nibandh: नमस्ते दोस्तों! आज मैं एक बहुत महत्वपूर्ण और दिल को छूने वाले विषय पर निबंध लिख रहा हूँ। यह निबंध बेटी पर आधारित है, जो स्कूल के बच्चों के लिए सरल भाषा में है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एक ऐसी योजना है जो हमारी बेटियों को बचाने और उन्हें पढ़ाने के बारे में है।
जब मैं इस बारे में सोचता हूँ, तो मन में एक अजीब सी खुशी और थोड़ी उदासी दोनों आ जाती है। खुशी इसलिए कि अब समाज बदल रहा है, और उदासी इसलिए कि पहले बेटियों के साथ कितना अन्याय होता था। आइए, इस निबंध में हम समझते हैं कि यह योजना क्या है, क्यों शुरू हुई, और हम सबको क्या करना चाहिए।
हमारे देश में पहले बेटियों की संख्या बहुत कम हो रही थी। कई जगहों पर 1000 लड़कों पर सिर्फ 800-900 लड़कियाँ ही होती थीं। इसका मुख्य कारण था कन्या भ्रूण हत्या। कुछ लोग सोचते थे कि बेटी तो बोझ है – उसकी शादी में दहेज देना पड़ेगा, घर छोड़कर चली जाएगी।
लेकिन यह सोच कितनी गलत है! बेटियाँ तो घर की रोशनी हैं। मेरी अपनी बहन है, वो कितनी प्यारी है – घर में हँसी लाती है, मम्मी-पापा की देखभाल करती है। अगर बेटियाँ नहीं होतीं, तो दुनिया कितनी सूनी हो जाती! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत, हरियाणा में इस योजना की शुरुआत की। इसका नाम रखा गया – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।
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इसका मतलब है बेटी को जन्म से बचाओ और उसे अच्छी शिक्षा दो। योजना का मुख्य उद्देश्य है लिंगानुपात सुधारना, बेटियों की सुरक्षा करना और उन्हें पढ़ाकर सशक्त बनाना। अब यह योजना मिशन शक्ति के साथ जुड़ी हुई है, और पूरे देश में चल रही है। 2025 में इसकी 10वीं वर्षगांठ मनाई गई, जो बताता है कि कितना बड़ा बदलाव आ रहा है।
इस योजना से बहुत अच्छे नतीजे आए हैं। कई राज्यों में लड़कियों की संख्या बढ़ी है। स्कूलों में लड़कियों का नामांकन ज्यादा हुआ है। पहले जहाँ लड़कियाँ घर पर रह जाती थीं, अब वे पढ़ने जाती हैं। सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की, जिसमें माता-पिता अपनी बेटी के लिए पैसे जमा कर सकते हैं।
स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति मिलती है। रेडियो पर, टीवी पर, गाँवों में जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। मुझे याद है, मेरे गाँव में एक बार एक कार्यक्रम हुआ था जहाँ सबने मिलकर बेटियों को सम्मान दिया। एक छोटी सी लड़की ने कहा, “मैं डॉक्टर बनूँगी और लोगों की मदद करूँगी।”
सुनकर आँखें नम हो गईं। बेटियाँ अगर पढ़ लें, तो वे कुछ भी कर सकती हैं – डॉक्टर, टीचर, इंजीनियर, या देश की सेवा करने वाली सैनिक। कल्पना कीजिए, अगर कल्पना चावला या मैरी कॉम जैसी बेटियाँ नहीं पढ़ पातीं, तो क्या होता?
लेकिन अभी भी चुनौतियाँ हैं। कुछ जगहों पर पुरानी सोच बनी हुई है। लड़कियों को स्कूल जाने से रोका जाता है, या उन्हें घर के काम में लगा दिया जाता है। हमें सबको मिलकर बदलाव लाना है। घर में बेटे-बेटी में कोई फर्क नहीं करना चाहिए। अगर बेटी अच्छे से पढ़े, तो पूरा परिवार मजबूत बनेगा। समाज में बेटियों का सम्मान बढ़ेगा, और देश भी तरक्की करेगा। हम बच्चे भी अपनी तरफ से मदद कर सकते हैं – अपनी बहनों को पढ़ने में साथ दें, दोस्तों को बताएँ कि बेटियाँ कितनी खास हैं।
अंत में, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक संदेश है – बेटियाँ हमारी ताकत हैं। आइए, हम सब वादा करें कि हम बेटियों को प्यार देंगे, सुरक्षा देंगे और शिक्षा देंगे। अगर हर घर में बेटी खुश और पढ़ी-लिखी होगी, तो हमारा देश और मजबूत बनेगा। बेटियाँ बचाओ, बेटियाँ पढ़ाओ – क्योंकि बेटी है तो कल है!