Baal Mazdoori Nibandh Hindi: बच्चे फूलों की तरह होते हैं नाजुक, मासूम और खुशियों से भरे। लेकिन कल्पना कीजिए कि अगर ये फूल स्कूल जाने की बजाय फैक्ट्री में काम करें, होटल में बर्तन मांजें या सड़क पर भारी सामान उठाएं। यह दृश्य देखकर दिल रो पड़ता है।
बाल मजदूरी एक बहुत बड़ी सामाजिक समस्या है, जो हमारे देश और दुनिया के कई हिस्सों में आज भी मौजूद है। यह निबंध स्कूल के बच्चों के लिए है, ताकि हम सब समझें कि बाल मजदूरी क्यों गलत है और इसे कैसे रोका जा सकता है।
बाल मजदूरी का मतलब है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों से जबरदस्ती या मजबूरी में काम करवाना। गरीबी के कारण कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय काम पर भेज देते हैं। कुछ बच्चे चाय की दुकानों पर काम करते हैं, कुछ ईंट भट्टों पर, तो कुछ घरों में नौकरानी या नौकर बनकर।
मैंने एक बार टीवी पर देखा था एक छोटा सा लड़का रात-दिन जूते सिलता था। उसकी आंखें थकी हुई थीं, हाथों पर छाले थे। देखकर आंसू आ गए। वह लड़का स्कूल में खेलना चाहता था, दोस्त बनाना चाहता था, लेकिन मजबूरी में काम कर रहा था। ऐसे लाखों बच्चे हैं जो अपना बचपन खो देते हैं।
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बाल मजदूरी के कई बुरे परिणाम हैं। सबसे पहले, बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो जाता है। भारी काम करने से उनकी कमर दुखती है, आंखें कमजोर हो जाती हैं। कई बच्चे खतरनाक जगहों पर काम करते हैं, जैसे पटाखा फैक्ट्री या खदान में, जहां दुर्घटना का डर हमेशा रहता है।
दूसरा, वे पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। बिना शिक्षा के वे बड़े होकर भी गरीब ही रहते हैं। इससे गरीबी का चक्र कभी खत्म नहीं होता। तीसरा, उनका मन टूट जाता है। खेलने-कूदने की उम्र में डांट सुनना, मार खाना इससे वे डरपोक या गुस्सैल हो जाते हैं। मुझे अपनी छोटी बहन को देखकर लगता है कि बचपन कितना कीमती है। अगर वह काम करेगी तो उसकी हंसी कहां जाएगी?
हमारे देश में बाल मजदूरी रोकने के लिए कानून हैं। संविधान कहता है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों से खतरनाक काम नहीं करवाया जा सकता। सरकार ने “बाल श्रम निषेध एवं नियमन अधिनियम” बनाया है। कई एनजीओ और संस्थाएं गरीब बच्चों को स्कूल भेजने में मदद करती हैं।
लेकिन सिर्फ कानून से कुछ नहीं होगा। हमें सबको मिलकर प्रयास करना होगा। अगर हम देखें कि कोई बच्चा काम कर रहा है, तो अपने शिक्षक या पुलिस को बताएं। माता-पिता को समझाएं कि शिक्षा ही बच्चों का भविष्य है। हम बच्चे भी मदद कर सकते हैं पुरानी किताबें और कपड़े दान करें, ताकि गरीब बच्चे स्कूल जा सकें।
अंत में कहना चाहूंगी कि हर बच्चे को बचपन जीने का हक है। बाल मजदूरी रोककर हम एक बेहतर समाज बना सकते हैं। अगर आज हम इन मासूम बच्चों को बचाएंगे, तो कल वे देश का निर्माण करेंगे। आइए, हम संकल्प लें कि बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौटाएं।