Janmashtami Bhashan Hindi: सुप्रभात, आदरणीय शिक्षकगण, प्रिय मित्रों और छोटे-छोटे प्यारे बच्चो!
आज मैं आपके सामने खड़ा हूँ और दिल से खुश हूँ कि मुझे जनमाष्ठमी के बारे में बात करने का मौका मिला है। जनमाष्ठमी वो खास दिन है जब हम भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाते हैं।
ये सण सिर्फ खुशी का नहीं, बल्कि प्यार, दोस्ती और अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है। मै आज आपको भाषण में बताऊँगा कि ये त्योहार हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है, और कैसे हम इससे जीवन की बहुत सी अच्छी बातें सीख सकते हैं।
जनमाष्ठमी भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। हजारों साल पहले मथुरा में राजा कंस बहुत क्रूर था। उसे डर था कि उसकी बहन देवकी का आठवाँ बच्चा उसे मार डालेगा। इसलिए उसने देवकी और वासुदेव को जेल में डाल दिया और उनके सारे बच्चों को मार डाला।
लेकिन जब आठवाँ बच्चा हुआ, वो था भगवान कृष्ण। जन्म होते ही चमत्कार हुआ – जेल के दरवाजे खुल गए, पहरेदार सो गए, और वासुदेव कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करके गोकुल ले गए। वहाँ यशोदा माँ और नंद बाबा ने उन्हें पाला। मुझे ये कहानी सुनकर हमेशा रोमांच होता है, क्योंकि ये बताती है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीतती है, चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न आए।
छोटे दोस्तों, कृष्ण का बचपन कितना मजेदार था न! वो माखन चोरते थे, गोपियों के साथ खेलते थे, और बांसुरी बजाते थे। उनकी बांसुरी की धुन सुनकर सबका मन शांत हो जाता था। दही-हांडी खेलना तो सबको सबसे ज्यादा पसंद आता है।
हम भी हर साल जनमाष्ठमी पर ऊँची हांडी बाँधते हैं, और लड़के-लड़कियाँ मिलकर पिरामिड बनाकर उसे फोड़ते हैं। मैंने एक बार कोशिश की थी, लेकिन नीचे गिर गया था। सब हँस पड़े, लेकिन फिर भी मजा आया। ये खेल हमें सिखाता है कि टीमवर्क से कुछ भी मुश्किल नहीं होता। कृष्ण ने भी गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुल वासियों को इंद्र के कोप से बचाया था। वो बताते हैं कि प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए, और दूसरों की मदद करनी चाहिए।
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स्कूल में जनमाष्ठमी के दिन क्या धूम होती है! हम झांकी सजाते हैं, कृष्ण-राधा के नाटक करते हैं, भजन गाते हैं। मैंने पिछले साल कृष्ण बनकर स्टेज पर बांसुरी बजाई थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन जब सब ताली बजाने लगे तो बहुत अच्छा लगा।
कृष्ण की कहानियाँ सुनकर लगता है कि वो हमारे साथ हैं। वो हमें सिखाते हैं कि दोस्ती कितनी जरूरी है – जैसे सुदामा से उनकी दोस्ती। सुदामा गरीब थे, लेकिन कृष्ण ने उन्हें कभी छोटा नहीं समझा। वो प्रेम और भक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण हैं।
भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता में अर्जुन को बहुत अच्छी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि अपना काम ईमानदारी से करो, फल की चिंता मत करो। जब मैं पढ़ाई में थक जाता हूँ या कोई टेस्ट डराता है, तो मैं सोचता हूँ कि कृष्ण कहते हैं – बस मेहनत करो, बाकी सब ठीक हो जाएगा। ये बातें मुझे हिम्मत देती हैं। जनमाष्ठमी हमें याद दिलाती है कि जीवन में खुश रहना चाहिए, दूसरों से प्यार करना चाहिए, और झूठ-छल से दूर रहना चाहिए।
घर पर हम रात को जागते हैं, क्योंकि कृष्ण आधी रात को पैदा हुए थे। मंदिर में घंटियाँ बजती हैं, भोग लगता है – माखन, मिश्री, फल। सब मिलकर खाते हैं और खुश होते हैं। मुझे लगता है कि ये सण सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि परिवार और दोस्तों को करीब लाने वाला भी है।
अंत में, मेरे प्यारे मित्रों, जनमाष्ठमी हमें सिखाती है कि छोटी-छोटी खुशियों में जीवन का असली मजा है। कृष्ण जैसे बनें – खट्याळ, लेकिन अच्छे दिल वाले। हम सब मिलकर अच्छे काम करें, एक-दूसरे की मदद करें, तो हमारा जीवन भी कृष्ण की तरह सुंदर बनेगा।
जय श्रीकृष्ण! जय जय श्रीकृष्ण!
धन्यवाद!