Bal Diwas Par Bhashan: सुप्रभात, आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्माननीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे छोटे-बड़े साथियों!
आज का दिन बहुत खास है। पूरा स्कूल रंग-बिरंगी सजावट से चमक रहा है, हँसी-खुशी का माहौल है और हर तरफ उत्साह भरा हुआ है। जी हाँ, आज हम सब मिलकर बाल दिवस मना रहे हैं। इस खुशी के मौके पर मैं आप सबके सामने बच्चों के दिन पर हिंदी में भाषण देने जा रहा हूँ।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम बच्चे इस देश का भविष्य हैं और हमें प्यार, सम्मान और खुशी का हक है। चलिए, आज हम इस दिन की खुशी को साथ मिलकर महसूस करें और समझें कि बाल दिवस क्यों मनाया जाता है।
बच्चों का दिन हर साल 14 नवंबर को मनाया जाता है क्योंकि यह दिन हमारे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। सब उन्हें प्यार से चाचा नेहरू कहते थे। चाचा नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे। वे कहते थे कि बच्चे देश के फूल हैं, उन्हें खिलने दो, उन्हें प्यार दो।
मुझे याद है, जब मैं छोटा था तो दादी बताती थीं कि चाचा नेहरू स्कूलों में जाते थे, बच्चों से बातें करते थे और उन्हें गुलाब के फूल देते थे। इसी वजह से बाल दिवस को गुलाब के फूलों से जोड़ा जाता है। आज भी स्कूल में हमें गुलाब मिलते हैं और मन खुश हो जाता है। चाचा नेहरू चाहते थे कि हर बच्चा पढ़े-लिखे, स्वस्थ रहे और खुश रहे। वे कहते थे, “बच्चे ही देश का भविष्य बनाएंगे।” यह सुनकर मन में गर्व होता है कि हम इतने महत्वपूर्ण हैं!
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बच्चों का दिन सिर्फ छुट्टी या मिठाई का दिन नहीं है। यह दिन हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम बच्चों के अधिकार क्या हैं। हमें खेलने का अधिकार है, पढ़ने का अधिकार है, सुरक्षित रहने का अधिकार है और प्यार पाने का अधिकार है।
लेकिन क्या हर बच्चा यह सब पाता है? मेरे एक दोस्त ने बताया कि उसके गाँव में कुछ बच्चे स्कूल नहीं जा पाते क्योंकि उन्हें काम करना पड़ता है। यह सुनकर मन दुखी हो जाता है। बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें उन बच्चों की भी मदद करनी चाहिए जो खुशी से वंचित हैं।
हम बड़े होकर क्या कर सकते हैं? हम अपने आस-पास के बच्चों को पढ़ने में मदद कर सकते हैं, उन्हें खिलौने दे सकते हैं या उनके साथ खेल सकते हैं। छोटी-छोटी बातें भी बहुत बड़ा बदलाव लाती हैं। जब हम किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान देखते हैं, तो अपना मन भी खुश हो जाता है।
स्कूल में बाल दिवस का मजा ही अलग है। आज टीचर्स हमें तरह-तरह के कार्यक्रम दिखाते हैं, नाच-गाना होता है, खेल होते हैं और हम सब बिना डर के मस्ती करते हैं। कभी-कभी तो टीचर्स खुद बच्चों जैसे बन जाते हैं और हमारे साथ खेलते हैं। यह देखकर हँसी आती है और लगता है कि आज का दिन सच में हमारा है।
घर पर भी मम्मी-पापा हमें स्पेशल ट्रीट देते हैं, पसंदीदा खाना बनाते हैं और कहानियाँ सुनाते हैं। लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि इस दिन हमें समझ आता है कि बचपन कितना कीमती है। हम भागते-दौड़ते हैं, खेलते हैं, शरारतें करते हैं और बेफिक्र होकर जीते हैं। बड़े लोग कहते हैं कि बचपन लौटकर नहीं आता, इसलिए इसे खूब एंजॉय करो। मैं भी यही मानता हूँ। हर दिन को बाल दिवस की तरह खुशी से जियो!
हमें यह भी याद रखना चाहिए कि चाचा नेहरू ने देश को आजाद कराने में बहुत मेहनत की थी। वे चाहते थे कि आजाद भारत में हर बच्चा खुश और मजबूत बने। इसलिए हमें पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, अच्छे संस्कार सीखने चाहिए और देश के लिए कुछ करना चाहिए।
जब हम बड़े होंगे तो डॉक्टर बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे, शिक्षक बनेंगे और देश को आगे ले जाएंगे। बचपन में जो सपने देखते हैं, वे ही बड़े होकर हकीकत बनते हैं। तो आओ, आज संकल्प लें कि हम अच्छे बच्चे बनेंगे, मेहनत करेंगे और दूसरों की मदद करेंगे।
अंत में, मैं सभी बच्चों को बाल दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ देता हूँ। हमारे टीचर्स और माता-पिता को धन्यवाद कहता हूँ जो हमें इतना प्यार देते हैं। चलो, मिलकर वादा करें कि हम अपने बचपन को खूबसूरत बनाएंगे और दूसरों के बचपन को भी रंगीन बनाएंगे। हैप्पी चिल्ड्रेंस डे! धन्यवाद, जय हिंद!