Bhagat Singh Speech In Hindi: भगत सिंह भाषण हिंदी

Bhagat Singh Bhashan Hindi: नमस्ते दोस्तों, आदरणीय शिक्षकों और प्रधानाचार्य जी। आज मैं आप सभी के सामने एक ऐसे वीर क्रांतिकारी के बारे में बोलने जा रहा हूं, जिनका नाम सुनते ही दिल में देशभक्ति की लहर दौड़ जाती है। वे हैं शहीद भगत सिंह।

यह भाषण विशेष रूप से स्कूल के बच्चों के लिए तैयार किया गया है, ताकि कक्षा 1 से 10 तक के सभी छात्र आसानी से समझ सकें। भगत सिंह भाषण में हम उनके जीवन की कहानी, उनके बलिदान और हमें मिलने वाली प्रेरणा के बारे में बात करेंगे। चलिए, शुरू करते हैं।

भगत सिंह भाषण शुरू करते हुए सबसे पहले उनके बचपन की बात करते हैं। भगत सिंह का जन्म 1907 में पंजाब के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत बहादुर और स्मार्ट थे। कल्पना कीजिए, जब वे छोटे थे, तब अंग्रेजों की गुलामी से देश को आजाद कराने का सपना देखते थे।

एक बार उन्होंने अपने खेत में बंदूकें उगाने की कोशिश की, क्योंकि वे सोचते थे कि बंदूकें से आजादी मिलेगी। यह सुनकर मुझे हंसी भी आती है और दिल में गर्व भी होता है। कितना प्यारा और मासूम विचार था! लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उन्होंने किताबें पढ़ीं, गांधी जी और अन्य क्रांतिकारियों से प्रेरणा ली।

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वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल हुए और देश की आजादी के लिए लड़ने लगे। भगत सिंह को लगता था कि अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण नीतियां देश को बर्बाद कर रही हैं, और हमें उन्हें रोकना होगा। उनकी आंखों में वह चमक थी, जो कहती थी कि देश के लिए कुछ भी कर गुजरेंगे।

अब बात करते हैं उनके बहादुरी भरे कामों की। 1928 में लाला लाजपत राय की मौत के बाद भगत सिंह ने बदला लेने का फैसला किया। उन्होंने साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स को मार गिराया। फिर, 1929 में दिल्ली असेंबली में बम फेंका, लेकिन किसी को चोट नहीं पहुंचाई।

वे चिल्लाए, “इंकलाब जिंदाबाद!” मतलब क्रांति जिंदाबाद। यह सुनकर मेरी रूह कांप जाती है। सोचिए, इतनी कम उम्र में जेल जाना, फांसी की सजा सुनना, लेकिन मुस्कुराते रहना। भगत सिंह ने जेल में किताबें लिखीं, जैसे “मैं नास्तिक क्यों हूं”। वे कहते थे कि धर्म से ऊपर देश है।

उनके दोस्त राजगुरु और सुखदेव भी उनके साथ थे। 23 मार्च 1931 को मात्र 23 साल की उम्र में उन्हें फांसी दे दी गई। लेकिन उन्होंने कभी डर नहीं दिखाया। मुझे लगता है कि उनकी कहानी सुनकर हम सभी के दिल में एक आग जलती है – देश के लिए जीने की आग। क्या हम भी इतने बहादुर बन सकते हैं? हां, अगर हम उनके जैसे सोचें।

भगत सिंह के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वे पढ़ाई के महत्व को समझते थे। स्कूल में रहते हुए उन्होंने इतिहास, राजनीति और साहित्य पढ़ा। आज हम बच्चे स्कूल जाते हैं, लेकिन कभी-कभी शिकायत करते हैं। लेकिन भगत सिंह हमें बताते हैं कि शिक्षा हथियार है।

वे गरीबों के लिए लड़ते थे, किसानों की मदद करते थे। कल्पना कीजिए, अगर आज वे जिंदा होते, तो हमारे देश की समस्याओं जैसे गरीबी, बेरोजगारी पर क्या कहते? शायद वे कहते, “उठो, लड़ो, बदलाव लाओ।” उनकी मौत के बाद पूरा देश रोया, लेकिन उनकी भावना आज भी जीवित है।

हर 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है। मुझे याद है, मेरे दादाजी भगत सिंह की कहानी सुनाते थे और उनकी आंखें नम हो जाती थीं। यह भावना हमें जोड़ती है – पीढ़ी दर पीढ़ी। हम बच्चों को उनके जैसे बनना चाहिए, न कि सिर्फ पढ़ाई करके, बल्कि देश की सेवा करके। छोटे-छोटे कामों से शुरू करें, जैसे कचरा न फेंकना, पेड़ लगाना या दोस्तों को देशभक्ति सिखाना।

अंत में, भगत सिंह हमें याद दिलाता है कि आजादी आसानी से नहीं मिली। यह बहादुरों के बलिदान से मिली। भगत सिंह जैसे शहीदों की वजह से हम आज खुली हवा में सांस लेते हैं। आइए, हम सब मिलकर वादा करें कि उनके सपनों का भारत बनाएंगे – जहां सब बराबर हों, खुश हों। जय हिंद! धन्यवाद।

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