Ramanujan Speech In Hindi: रामानुजन पर भाषण हिंदी

Ramanujan Bhashan In Hindi: सम्माननीय प्रधानाचार्य महोदय, आदरणीय शिक्षकगण, और मेरे प्यारे साथियों,

आज मैं आपके सामने एक ऐसे महान व्यक्ति के बारे में बोलने जा रहा हूं, जिनकी कहानी हमें सिखाती है कि सपने कितने भी बड़े क्यों न हों, मेहनत और लगन से उन्हें हासिल किया जा सकता है। यह भाषण है श्रीनिवास रामानुजन पर, जो भारत के एक महान गणितज्ञ थे।

रामानुजन की जीवन कहानी हमें प्रेरित करती है कि कैसे एक साधारण परिवार से निकलकर कोई व्यक्ति दुनिया को अपनी प्रतिभा से चकित कर सकता है। आज हम भाषण के माध्यम से उनके जीवन की कुछ झलकियां देखेंगे, ताकि हम सब उनके जैसे बनने की कोशिश करें।

रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड नामक छोटे से शहर में हुआ था। उनका परिवार बहुत गरीब था, पिता एक छोटी दुकान चलाते थे और मां घर संभालती थीं। बचपन से ही रामानुजन को संख्याओं से प्यार था।

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कल्पना कीजिए, एक छोटा सा बच्चा जो स्कूल में किताबें पढ़ता है और खुद से गणित के कठिन सवाल हल करने लगता है। वे किताबें उधार लेकर पढ़ते थे, क्योंकि घर में पैसे नहीं थे नई किताबें खरीदने के। लेकिन उनकी आंखों में एक चमक थी, एक जुनून जो उन्हें रात-रात भर जागकर फॉर्मूले बनाने पर मजबूर करता था।

कभी-कभी वे भूखे रहकर भी गणित में डूबे रहते, और उनकी मां उन्हें देखकर रोतीं, लेकिन वे जानती थीं कि उनका बेटा कुछ बड़ा करने वाला है। यह सोचकर दिल भर आता है कि कैसे गरीबी ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया।

स्कूल के दिनों में रामानुजन की प्रतिभा सबको दिखने लगी। वे गणित में इतने तेज थे कि टीचर भी उनके सवालों का जवाब नहीं दे पाते थे। लेकिन जीवन आसान नहीं था। कॉलेज में वे गणित के अलावा अन्य विषयों में कमजोर थे, इसलिए वे फेल हो गए।

कल्पना कीजिए उस दर्द को, जब कोई इतनी प्रतिभा वाला व्यक्ति डिग्री नहीं ले पाता। लेकिन रामानुजन ने हार नहीं मानी। वे क्लर्क की नौकरी करने लगे, लेकिन फुर्सत के समय में गणित पर काम करते रहे। उन्होंने हजारों फॉर्मूले खुद से खोजे, जैसे अनंत श्रृंखलाएं और संख्या सिद्धांत के रहस्य। उनकी नोटबुकें आज भी दुनिया के गणितज्ञों के लिए खजाना हैं।

एक बार उन्होंने ब्रिटिश गणितज्ञ जी.एच. हार्डी को पत्र लिखा, जिसमें उनके कुछ फॉर्मूले थे। हार्डी ने पढ़ा और हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “यह तो जीनियस है!” और रामानुजन को इंग्लैंड बुलाया। यह वो पल था जब एक भारतीय युवक की प्रतिभा ने दुनिया का ध्यान खींचा।

लेकिन इंग्लैंड में ठंडी जलवायु और शाकाहारी भोजन की कमी से वे बीमार पड़ गए। फिर भी, उन्होंने वहां रहकर रॉयल सोसाइटी के सदस्य बनने का गौरव हासिल किया। इतनी कम उम्र में इतनी उपलब्धियां! यह सोचकर गर्व होता है कि हमारे देश ने ऐसे रत्न दिए हैं।

रामानुजन की कहानी सिर्फ गणित की नहीं, बल्कि संघर्ष और विश्वास की है। वे कहते थे कि गणित उनके लिए देवी का आशीर्वाद है। उनकी मां उन्हें बताती थीं कि सपनों में देवी नामागल उन्हें फॉर्मूले बताती हैं। यह सुनकर लगता है कि कैसे आस्था और विज्ञान एक साथ चल सकते हैं।

लेकिन दुख की बात है कि 26 अप्रैल 1920 को मात्र 32 साल की उम्र में वे हमें छोड़कर चले गए। तपेदिक ने उन्हें हराया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उनके फॉर्मूले आज ब्लैक होल थ्योरी से लेकर कंप्यूटर साइंस तक में इस्तेमाल होते हैं।

कल्पना कीजिए, अगर रामानुजन न होते तो दुनिया कितनी पीछे रह जाती। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि गरीबी या असफलता हमें रोक नहीं सकती, अगर दिल में जुनून हो। मैं खुद सोचता हूं कि अगर मैं भी इतनी मेहनत करूं, तो क्या हासिल नहीं कर सकता? यह भावना हमें छू जाती है, क्योंकि यह हम सबकी कहानी है – सपने देखने और उन्हें पूरा करने की।

आज के दौर में, जब हम मोबाइल और गेम्स में खोए रहते हैं, रामानुजन हमें याद दिलाते हैं कि पढ़ाई और जिज्ञासा कितनी महत्वपूर्ण है। वे एक उदाहरण हैं कि भारत की मिट्टी में कितनी प्रतिभाएं छिपी हैं। हमें उनके जैसे बनना चाहिए – निडर, मेहनती और सपनों का पीछा करने वाला।

अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि रामानुजन की जीवन यात्रा हमें प्रेरित करती रहेगी। आइए, हम सब मिलकर उनके सपनों को आगे बढ़ाएं और अपने देश को गौरवान्वित करें। धन्यवाद!

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