Beti Bachao Beti Padhao Speech In Hindi: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर भाषण

Beti Bachao Beti Padhao Bhashan Hindi: सम्माननीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय शिक्षकगण, मेरे प्यारे भाइयों और बहनों। आज मैं आपके सामने एक बहुत महत्वपूर्ण विषय पर बोलने आया हूँ। हम सब जानते हैं कि हमारे देश में बेटियाँ कितनी कीमती हैं, लेकिन कभी-कभी उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए।

आज का यह अवसर हमें याद दिलाता है कि हमें बेटियों की रक्षा करनी है और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना है। मैं आज इस मंच से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के बारे में अपनी बात रखूँगा। यह विषय मेरे दिल के बहुत करीब है, क्योंकि मैंने अपनी छोटी बहन को देखा है कि वह कितनी मेहनत से पढ़ती है और सपने देखती है। चलिए, अब हम इस विषय पर गहराई से बात करते हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भाषण शुरू करते हुए, मैं कहना चाहूँगा कि यह योजना हमारे देश की एक बहुत बड़ी पहल है। यह योजना 22 जनवरी 2015 को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा हरियाणा के पानीपत में शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य है बेटियों को बचाना और उन्हें पढ़ाना।

आप जानते हैं न, पहले कुछ जगहों पर लोग बेटियों को बोझ समझते थे। बच्चे के जन्म से पहले ही पता लगाकर कई बार उन्हें दुनिया में आने नहीं दिया जाता था। इससे हमारे देश में लड़कियों की संख्या कम हो रही थी। बच्चे के लिंग अनुपात में कमी आ गई थी, जो बहुत चिंता की बात थी।

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लेकिन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना ने इस समस्या पर ध्यान दिया। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मिलकर चलाई जाती है।

मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तो मेरी दादी बताती थीं कि उनके समय में बेटियाँ स्कूल कम जाती थीं। लेकिन अब यह योजना कहती है कि बेटियाँ भी बेटों की तरह पढ़ें, खेलें और आगे बढ़ें।

मैंने एक कहानी सुनी है, जो मेरे दिल को छू गई। मेरे गाँव में एक लड़की थी, नाम था रानी। उसके पापा गरीब थे और सोचते थे कि बेटी को पढ़ाने से क्या फायदा, शादी हो जाएगी। लेकिन रानी को पढ़ने का बहुत शौक था। वह रात में चुपके से किताबें पढ़ती थी। एक दिन गाँव में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का कार्यक्रम हुआ।

वहाँ अधिकारियों ने बताया कि सरकार बेटियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना चला रही है, जिसमें पैसे जमा करके उनकी पढ़ाई और शादी के लिए मदद मिलती है। रानी के पापा ने वह बात सुनी और उनका दिल पिघल गया। उन्होंने रानी को स्कूल भेजा।

आज रानी एक अच्छी नौकरी कर रही है और अपने परिवार की मदद कर रही है। ऐसी कहानियाँ सुनकर मुझे लगता है कि अगर हम बेटियों को मौका दें, तो वे आसमान छू सकती हैं। लेकिन दुख की बात है कि आज भी कुछ जगहों पर बेटियों के साथ भेदभाव होता है।

उन्हें कम खाना मिलता है, कम कपड़े और पढ़ाई का मौका नहीं। क्या यह सही है? नहीं न! बेटियाँ तो घर की लक्ष्मी हैं। वे माँ बनकर परिवार को संभालती हैं, डॉक्टर बनकर बीमारों को ठीक करती हैं और शिक्षिका बनकर दूसरों को पढ़ाती हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत कई काम हो रहे हैं। सरकार ने जागरूकता अभियान चलाए हैं, जैसे पोस्टर, रैलियाँ और स्कूलों में कार्यक्रम। डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बच्चे के लिंग का पता लगाने वाली मशीनों का गलत इस्तेमाल न करें। इसके अलावा, बेटियों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है।

सुकन्या समृद्धि खाता खोलकर माता-पिता पैसे जमा कर सकते हैं, जिस पर अच्छा ब्याज मिलता है। मुझे गर्व है कि हमारे देश में अब लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। कुछ राज्यों में तो लिंग अनुपात में सुधार हुआ है। लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है।

हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। स्कूल में हम लड़के और लड़कियाँ साथ खेलें, साथ पढ़ें और एक-दूसरे की मदद करें। घर में मम्मी-पापा को कहें कि बहन को भी बराबर प्यार दें। अगर कोई बेटी पढ़ना चाहे, तो उसकी मदद करें। मैं खुद अपनी बहन को होमवर्क में मदद करता हूँ, और वह खुश हो जाती है। ऐसी छोटी-छोटी बातें बड़ी बदलाव लाती हैं।

इस योजना से न केवल बेटियाँ मजबूत होंगी, बल्कि पूरा देश मजबूत होगा। कल्पना कीजिए, अगर हर बेटी पढ़ी-लिखी हो, तो हमारे देश में कितनी तरक्की होगी। कोई वैज्ञानिक बनेगी, कोई खिलाड़ी, कोई नेता। जैसे रानी लक्ष्मीबाई ने देश के लिए लड़ाई लड़ी, वैसे ही आज की बेटियाँ भी देश को आगे ले जाएँगी।

लेकिन इसके लिए हमें पुरानी सोच बदलनी होगी। बेटी को बोझ नहीं, वरदान समझना होगा। मैंने एक बार टीवी पर देखा था कि एक गाँव में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के कारण सारी लड़कियाँ साइकिल चलाकर स्कूल जाती हैं। वे कितनी खुश लगती थीं! मुझे भी वैसा ही महसूस होता है जब मैं अपनी बहन को मुस्कुराते देखता हूँ।

अंत में, मैं कहना चाहूँगा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक संकल्प है। हमें इस संकल्प को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। हर बेटी को बचाना है, पढ़ाना है और सम्मान देना है। अगर हम ऐसा करेंगे, तो हमारा देश और मजबूत बनेगा। आइए, हम सब मिलकर वादा करें कि बेटियों के साथ कभी भेदभाव नहीं करेंगे। जय हिंद! जय भारत!

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