Swachata Ka Mahatva Hindi Nibandh: स्वच्छता सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह हमारी जिंदगी का तरीका है। जब हम अपने आस-पास साफ-सफाई रखते हैं, तो मन भी खुश रहता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। स्वच्छता का महत्व बहुत बड़ा है क्योंकि एक स्वच्छ जगह पर रहने से हम बीमारियों से दूर रहते हैं और खुशी से जीते हैं।
आजकल हम सब “स्वच्छ भारत अभियान” के बारे में सुनते हैं, जो महात्मा गांधी जी के सपने को पूरा करने के लिए शुरू हुआ था। गांधी जी कहा करते थे कि स्वच्छता ईश्वर की सेवा है। यह निबंध स्कूल के बच्चों के लिए है, ताकि हम सब समझें कि छोटी-छोटी आदतें बदलकर हम अपना घर, स्कूल और देश कितना सुंदर बना सकते हैं।
सबसे पहले, स्वच्छता हमारे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अगर हम अपने हाथ साबुन से नहीं धोते, घर में कचरा इधर-उधर फेंकते हैं या गंदे पानी में खेलते हैं, तो बीमारियां जैसे पेट दर्द, हैजा, मलेरिया आसानी से हो सकती हैं। मेरी छोटी बहन एक बार गंदे हाथ से खाना खाकर बीमार पड़ गई थी।
ये भी पढ़ें: Role Of Children In Nation Building Essay In Hindi: बालकों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका निबंध
उस दिन हमें बहुत दुख हुआ और डॉक्टर ने कहा कि सिर्फ स्वच्छता की कमी से ऐसा हुआ। अब हम सब घर में नियम बनाए रखते हैं खाना खाने से पहले हाथ धोना, सब्जियां अच्छे से धोकर खाना। बच्चे अगर स्कूल में अपने डिब्बे साफ रखें और पानी की बोतल साफ करें, तो वे हमेशा तंदुरुस्त रहेंगे। स्वच्छता से हमारा शरीर मजबूत बनता है और हम अच्छे से पढ़ाई-लिखाई कर पाते हैं।
दूसरा, स्वच्छता पर्यावरण को बचाती है। जब हम कचरा सड़क पर फेंकते हैं, तो नदियां गंदी हो जाती हैं, जानवर बीमार पड़ते हैं और हवा प्रदूषित हो जाती है। एक बार मैंने पार्क में देखा कि प्लास्टिक की थैलियां पक्षियों के गले में फंस गई थीं। उस दिन दिल बहुत दुखी हुआ।
बच्चे अगर घर से निकलते समय कचरे को अलग-अलग डिब्बे में डालें एक में गीला कचरा, दूसरे में सूखा – तो हमारा पर्यावरण साफ रहेगा। स्कूल में हम पेड़ लगाते हैं और उनके आस-पास सफाई रखते हैं, तो हवा ताजी रहती है। स्वच्छ भारत बनाने में हम बच्चों की भूमिका बहुत बड़ी है क्योंकि हम नई पीढ़ी हैं और नई आदतें आसानी से सीख सकते हैं।
तीसरा, स्वच्छता से हमारा मन शांत रहता है। एक साफ-सुथरा कमरा देखकर कितना अच्छा लगता है ना? सुबह उठकर बिस्तर ठीक करना, किताबें व्यवस्थित रखना ये छोटी बातें हमें अनुशासन सिखाती हैं। मेरे दोस्त का घर हमेशा साफ रहता है, वहां जाने पर मन प्रसन्न हो जाता है।
वहीं गंदे घर में रहने से चिड़चिड़ापन आता है। स्कूल में अगर हम अपनी कक्षा साफ रखें, तो पढ़ाई में मन लगता है और शिक्षक भी खुश होते हैं। स्वच्छता से हम दूसरों का सम्मान करना सीखते हैं क्योंकि साफ जगह सबकी साझा जिम्मेदारी होती है।
अंत में कहना चाहूंगा कि स्वच्छता का महत्व सिर्फ किताबों में नहीं, हमारे रोज के जीवन में है। अगर हर बच्चा आज से संकल्प ले कि मैं अपने आस-पास स्वच्छता रखूंगा, तो कल हमारा भारत सच में स्वच्छ और सुंदर बनेगा। माता-पिता और शिक्षक हमें सिखाएं, लेकिन असली बदलाव हम बच्चों से आएगा। आइए, हम सब मिलकर स्वच्छता की इस मुहिम में शामिल हों। एक छोटा कदम बड़ा बदलाव ला सकता है। स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत!