Indira Gandhi Speech In Hindi: आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,
नमस्कार! आज मैं आपके सामने भारत की एक महान बेटी, लौह महिला के नाम से प्रसिद्ध इंदिरा गांधी पर भाषण देने जा रहा/रही हूँ। इंदिरा गांधी जी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया।
उनके जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है – कि कैसे एक महिला कठिनाइयों को पार करके देश की सेवा कर सकती है। उनके बारे में सोचते ही मन में गर्व की भावना उमड़ आती है।
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। वे हमारे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की इकलौती बेटी थीं। उनका पूरा नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी था। बचपन से ही वे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हुई थीं।
छोटी उम्र में ही उन्होंने बच्चों की ‘वानर सेना’ बनाई, जो कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की मदद करती थी। कल्पना कीजिए, एक छोटी बच्ची इतनी बहादुर कि जेल जाने से भी नहीं डरती! उनकी माँ कमला नेहरू जी की तबीयत हमेशा खराब रहती थी और पिता जी जेल में रहते थे, फिर भी इंदिरा जी ने कभी हिम्मत नहीं हारी। मुझे उनकी यह बात बहुत छू जाती है – कि अकेलेपन और दुःख में भी वे मजबूत बनी रहीं।
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शिक्षा के लिए वे भारत और विदेश के कई स्कूलों में गईं, जैसे शांतिनिकेतन और ऑक्सफोर्ड। 1942 में उन्होंने फिरोज गांधी जी से शादी की। उनके दो बेटे हुए – राजीव और संजय। स्वतंत्रता के बाद वे अपने पिता जी की सहायिका बनीं और धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय हो गईं। 1966 में वे भारत की प्रधानमंत्री बनीं – पहली महिला! उस समय देश में कई समस्याएँ थीं, जैसे गरीबी, भुखमरी और पड़ोसी देशों से खतरा। लेकिन इंदिरा गांधी जी ने हार नहीं मानी।
उनके कार्यकाल में सबसे बड़ा काम 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध था। पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में अत्याचार किए, लाखों शरणार्थी भारत आए। इंदिरा जी ने साहस से युद्ध लड़ा और भारत की जीत हुई। बांग्लादेश एक नया देश बना।
यह देखकर मन में कितना गर्व होता है! वे ‘आयरन लेडी’ कहलाने लगीं क्योंकि उनके फैसले मजबूत थे। उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, ताकि गरीबों को आसानी से लोन मिले। हरित क्रांति शुरू की, जिससे भारत अनाज में आत्मनिर्भर हो गया। पहले हम अनाज मँगवाते थे, अब खुद पैदा करने लगे। पोखरण में परमाणु परीक्षण करवाया, जिससे भारत की ताकत बढ़ी। इन सब कामों से लाखों लोगों का जीवन बेहतर हुआ। मुझे लगता है, वे सच में देश की माँ थीं, जो हर बच्चे की तरह देश की चिंता करती थीं।
लेकिन उनका जीवन आसान नहीं था। कई चुनौतियाँ आईं, विवाद भी हुए। 1975 में आपातकाल लगा, जो एक कठिन समय था। फिर भी, वे हमेशा देश की एकता और सुरक्षा के लिए सोचती थीं। 1980 में फिर प्रधानमंत्री बनीं। दुर्भाग्य से, 31 अक्टूबर 1984 को उनके ही अंगरक्षकों ने उन्हें गोली मार दी। उस दिन पूरे देश में दुःख की लहर दौड़ गई। मैं सोचता हूँ, कितनी निष्ठा थी उनमें कि जान पर खेलकर भी देश सेवा की। उनकी आखिरी बातें याद आती हैं – “मैं जीते जी देश की सेवा करूँगी और मरकर भी।”
मेरे प्यारे साथियों, इंदिरा गांधी जी से हमें सीख मिलती है कि साहस, ईमानदारी और मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। लड़कियाँ उनसे प्रेरणा लें कि महिला होने से कोई काम छोटा नहीं होता। हम सब मिलकर उनके सपनों का भारत बनाएँ – मजबूत, एकजुट और समृद्ध।
अंत में, इंदिरा गांधी जी को कोटि-कोटि नमन। भारत माता की जय!
धन्यवाद। जय हिंद!